ऊंट एक राजकीय पशु, राजस्थान में उष्ट्र पर्यटन विकास की प्रबल संभावनाएं : डॉ. आर्तबंधु साहू






बीकानेर, 8 दिसम्बर (सीके न्यूज/छोटीकाशी)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र [एनआरसीसी] के निदेशक डा. आर्तबंधु साहू ने कहा कि प्रदेश में उष्‍ट्र पर्यटन विकास की प्रबल संभावनाएं है। ऊंट एक राजकीय पशु है तथा क्षेत्र में बाहुल्‍य स्थिति एवं महत्‍व को देखते हुए पशु मेलों, ऊंट उत्‍सव आदि विविध महत्‍वपूर्ण अवसरों पर उष्‍ट्र पर्यटन विकास को सरकार द्वारा तरजीह दी जाए तो इससे न केवल ऊंटपालकों अपितु प्रदेश में ऊंट की स्थिति में भी सुधार लाया जा सकता है। केंद्र द्वारा अनुसूचित जातिय योजना के तहत जैसलमेर के गांव सांवता में पशु स्वास्थ्य शिविर एवं कृषक वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम में उन्होंने पशुपालकों को सरकारी योजनाओं के भरपूर लाभ उठाने की भी बात कही। शिविर में गांव सांवता व आस पास के 113 पशुपालकों ने अपने पशुओं ऊंट 654, गाय 125, भेड़ व बकरी 650 कुल 1429 पशुओं सहित अपनी सहभागिता निभाते हुए शिविर में प्रदत पशु स्वास्थ्य सुविधाओं का भरपूर लाभ लिया। शिविर में महिलाओं की अच्‍छी खासी सहभागिता देखी गई। साहू ने पशुपालकों से बातचीत करते हुए कहा कि बदलते परिवेश में पशुपालन व्यवसाय को अद्यतन जानकारी एवं नूतन आयाम के रूप में अपनाने से पशुपालक, पशुधन से अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त सकते हैं। केन्‍द्र निदेशक डॉ.साहू ने विशेषकर ऊंटनी के दूध से निर्मित मूल्‍य संवर्धित उत्‍पादों कुल्‍फी, आइसक्रीम, सुगन्धित दूध, चाय, कॉफी, पेड़ा, खीर का जिक्र करते हुए कहा कि एनआरसीसी द्वारा ऊंटनी के दूध से ऐसे कई विभिन्‍न स्‍वादिष्‍ट दुग्‍ध उत्‍पाद तैयार किए गए हैं जो कि आमजन में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। प्रदेश में ऊंटों की संख्‍या को ध्‍यान में रखते हुए ऊंटनी के दुग्‍ध व्‍यवसाय में प्रबल संभावनाएं व्‍याप्‍त है। केन्‍द्र की एससीएसपी उपयोजना के नोडल अधिकारी डॉ आर.के.सावल, प्रधान वैज्ञानिक, केंद्र वैज्ञानिक डा. शिरीष नारनवरे, पशु चिकित्सा अधिकारी डा. काशीनाथ, देगराय संरक्षण समिति जैसलमेर सुमेर सिंह, मनजीत सिंह सहित अनेक उपस्थित थे।