शांतिलाल मुथा को दूसरा 'गांधीयन फिलॉसॉफी अवॉर्ड', सूर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. संजय चोरडिया ने दी जानकारी




-'सूर्यदत्ता ग्लोबल पीस रिसर्च फाउंडेशन' द्वारा हुआ घोषित


पुणे। यहां के विश्व स्तरीय सूर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट द्वारा संचालित सूर्यदत्त ग्लोबल पीस रिसर्च फाउंडेशन द्वारा दूसरा 'गांधीयन फिलॉसॉफी अवॉर्ड' भारतीय जैन संगठना व शांतिलाल मुथा फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष शांतिलाल मुथा को घोषित किया गया है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 152वीं जयंती के अवसर पर यह पुरस्कार विशेष मानचिन्ह, प्रमाणपत्र और स्कार्फ के रूप में प्रदान किया जायेगा। सेनापति बापट रोड स्थित वर्धमान प्रतिष्ठान में गांधी सप्ताह के दौरान यह पुरस्कार प्रदान किया जायेगा। यह जानकारी सूर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय चोरडिया ने दी।

यह पुरस्कार हर साल गांधीजी के विचारों को अमल में लाकर हर कार्य करने वाले तपस्वी को दिया जाता है। शांतिलाल मुथा का भारतीय जैन संगठना और शांतिलाल मुथा फाउंडेशन के माध्यम से किया कार्य मानवीय है। भूकंप पीड़ितों की मदद, कोरोना पीड़ितों की मदद, जरूरतमंद छात्रों को मदद, वैद्यकीय सेवा और एम्बुलैंस के साथ अन्य कई उपक्रम वे अमल में लाए है। उनके किए इन्हीं कार्यों को सराहने के लिए उन्हें इस साल का 'गांधीयन फिलॉसॉफी अवॉर्ड' दिया जानेवाला है।

 डॉ. संजय चोरडिया ने कहा, 'सूर्यदत्ता पिछले दो दशकों से गांधीवादी विचारधारा को आदर्श मानकर काम कर रहा है। इस वर्ष 152वीं गांधी जयंती के अवसर पर गांधी सप्ताह का आयोजन छात्रों और शिक्षकों में गांधीवादी विचारों को जगाने के लिए किया गया है। इसमें विभिन्न विभागों के तहत प्रतियोगिताएं व गतिविधियां आयोजित की जाएगी। यह पुरस्कार इस सप्ताह में शांतिलाल मुथा को गणमान्य व्यक्तियों के हाथों प्रदान किया जायेगा। इससे पहले गांधीजी की 150 वीं जयंती के मौके पर विशेष खादी को बढ़ावा देने के लिए सूर्यदत्ता के छात्रों ने एक बड़ी प्रदर्शनी का आयोजन किया था। साथ ही खादी के कॉन्सेप्ट पर फैशन शो भी किया था। सूर्यदत्ता ग्लोबल पीस रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना गांधी विचारों को छात्रों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और इन विचारों के साथ जीने वालों को सम्मानित करने के लिए की गई है। उल्लेखनीय है कि पहला 'गांधीयन फिलॉसॉफी अवॉर्ड' वरिष्ठ गांधीवादी नेता, विचारक डॉ. कुमार सप्तर्षि को प्रदान कर पिछले साल सम्मानित किया गया था।