मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर साकेत कर रहा लोगों को जागरुक





चिकित्सकों की टीम में डॉ. असित अरोड़ा, डॉ. देवव्रत आर्य, डॉ. अक्षय तिवारी, डॉ. अक्षत मलिक हुए पत्रकारों से रुबरु


बीकानेर, 28 मई (सीके न्यूज/छोटीकाशी)। कैंसर का अब पूरी तरह से इलाज संभव है, शुरुआती डायग्नोसिस से न सिर्फ मरीज के जीवित मचने की संभावना बढ़ जाती है बल्कि उनकेे जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर हो जाती है। मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर साकेत की ओर से शनिवार को आयोजित द पार्क पैरेडाइज होटल में पत्रकार सम्मेलन में नई दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल, साकेत में जीआई सर्जरी के निदेशक डॉ. असित अरोड़ा, कैंसर केयर/ऑन्कोलॉजी के निदेशक डॉ. देवव्रत आर्य, मस्कुलोस्केलेटल ऑन्कोलॉजी के निदेशक डॉ. अक्षय तिवारी, हैड और नैक ऑन्कोलॉजी सलाहकार डॉ. अक्षत मलिक ने संयुक्त रुप से यह बात कही। सामूहिक रोग नियंत्रण के महत्व, आधुनिक उपचार पद्धतियों को बताने और शुरुआती चरण में जांच पर जोर दिए जाने के लिए डा. अरोड़ा ने कहा कि 'टेक्नोलॉजी की तरक्की की बदौलत न्यूनतम चीर-फाड़ वाली कैंसर सर्जरी अब सभी जगह उपलब्ध हो गई है। परंपरागत शल्य क्रिया के मुकाबले न्यूनतम शल्य क्रिया से मरीजों को कई सारे फायदे होते हैं जिनमें कम से कम दाग, तेज रिकवरी, कम दर्द, अस्पताल में कम समय तक रुकना और सर्जरी के बाद बहुत कम परेशानियां शामिल हैं। दा विन्सी रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक सर्जिकल टेक्नोलॉजी के जरिये हम अधिक कुशलता से ये प्रक्रियाएं अपना सकते हैं जिसमें ऑपरेशन के बाद कम से कम देखभाल तथा शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिलता है। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के बाद रोबोटिक सर्जरी की मांग बढ़ी है क्योंकि इससे अस्पताल में कम समय रुकना पड़ता है और सर्जरी के बाद परेशानियां भी कम होती हैं। डॉ. आर्य ने बताया कि पहले मरीजों को कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ती थी लेकिन ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में हुई तरक्की से इस बीमारी की इलाज पद्धति में आश्चर्यजनक बदलाव आया है। डॉ. तिवारी ने बताया कि आर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजी सर्जरी में कंप्यूटर नेविगेशन भी एक बड़ी उपलब्धि है जिससे इस तरह की सर्जरी सटीक और सुरक्षित हो पाती है। डॉ. मलिक ने कहा कि आधुनिक तरक्की और आधुनिक टेक्नोलॉजी की मदद से जटिल और पहुंच से दूर वाले ट्यूमर भी सर्जिकल रोबोट के जरिये न्यूनतम शल्य क्रिया या दाग रहित तरीके से निकाल लिए जाते हैं। इस तरह के ज्यादा से ज्यादा से कैंसर मामलों का इलाज संभव हो गया है और इसमें शारीरिक सौंदर्य बिगडऩे की संभावना भी नहीं रहती है।