संक्रांति पर्व- गुरुओं के आदर्शों से प्रेरणा लेकर परम सत्य के पथ पर चलें-जैनाचार्य विजय नित्यानंद सूरिश्वर





बीकानेर, 13 अप्रेल। गच्छाधिपति जैनाचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी महाराज के सान्निध्य में मंगलवार को वल्लभ सर्किल, गोगागेट के बाहर स्थित गौड़ी पाश्र्वनाथ परिसर में  महावीर स्वामी की पाट परम्परा के 73वें पट्टधर आचार्य श्री विजयानंद सूरीश्वर जी ( आत्माराम जी ) महाराज के 185 वीं जयंती, नवसंवत तथा संक्रान्ति महोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न इलाकों से आए व स्थानीय चुनिंदा श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। श्री आत्मानन्द जैन सभा बीकानेर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में आचार्य श्री विजय वल्लभ सूरि समुदाय के गच्छाधिपति जैनाचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी महाराज के  विशेष महामांगलिक कार्यक्रम को वल्लभ वाटिका के फेस बुक पेज तथा यूट््यूब चेंनल पर आम जन के लिए प्रसारित किया गया। कार्यक्रम में साध्वीश्री सौम्य दर्शना, अक्षय दर्शना, वरिष्ठ चन्द्र कुमार कोचर, शांति लाल सेठिया, शांति लाल कोचर, किसान नेता वल्लभ कोचर, लीलम सिपानी, जितेन्द्र भंसाली आदि गणमान्य श्रावक मौजूद थे। इन श्रावकों ने आचार्य श्री विजयानंद सूरीश्वर जी (आत्माराम जी) महाराज के चित्र पर पुष्पहार पहनाकर व गच्छाधिपति व मुनिवरों का वंदन कर स्वागत किया। गच्छाधिपति आचार्यश्री विजय नित्यानंद सूरिश्वर ने प्रवचन में कहा कि गुरु आत्माराम जी महाराज ने कठिन परिस्थितियों में सत्य पथ पर चलते हुए जैन श्वेताम्बर तपागच्छ संघ के कल्पवृृक्ष के रूप् में प्रतिष्ठित है। उन्होंने कहा कि गुरु आत्माराम जी महाराज ने देश में व्याप्त धार्मिक शिथिलाचार तथा अंध विश्वासों को समाप्त कर धर्म का सच्चा मार्ग दिखाया।  पंजाब के लहरा गांव में क्षत्रिय परिवार जन्में आत्मानंदजी ने जैन धर्म मे दीक्षित होकर सर्वोच्च आचार्य पद प्राप्त किया । उनका सभी धर्म-दर्शनों के शास्त्रों तथा रहस्यों पर पूर्ण अधिकार था । गुरु आत्माराम जी  कहते थे कि सच्चा सो मेरा है , मेरा सो सच्चा नही । गुरुओं के आदर्शों से प्रेरणा लेकर परम सत्य के पथ पर चलें तथा देव, गुरु व धर्म की आराधना व भक्ति करें। गच्छाधिपति, जैनाचार्य विजय नित्यानंद सूरिश्वर ने अनेक शेर ’’क्या मजा है जलने से परवाने से पूछो, क्या मजा है भक्ति में दीवानों से पूछो’, सुनाते हुए कहा कि अम्बाला मंे विजय वल्लभ इंटरनेशनल स्कूल में भी 151 इंच की प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। गुरु वल्लभ का बीकानेर से अधिक लगाव होने के कारण बीकानेर को वल्लभ नगरी कहा जाता है। यहां के श्रावक-श्राविकाओं में गुरु वल्लभ के प्रति निष्ठा व भावना अनुकरणीय है।
मुनि मोक्षानंद विजय ने कहा कि नववर्ष व जैनाचार्य आत्मारामजी की जयंती  से प्रेरणा व्यथाओं व विकारों को दूर कर परमात्म भक्ति व आत्मशुद्धि करें। प्रतिदिन मंदिरों में पूजा व दर्शन करें। हमारे देव व उनके देवालय दर्शनीय नहीं पूजनीय है। सच्चे पुजारी बनकर उनकी पूजा अर्चना करें।
साध्वीश्री सौम्य दर्शना ने कहा कि संक्रांति महोत्सव के मंगलपाठ को श्रद्धा व विश्वास के साथ ग्रहण करें। गलत मार्ग का परिमार्जन कर सम्यक् मार्ग पर चलें। जिनशासन की विशालता व दिग्दर्शिता और सुदृृढ़ता को प्रतिष्ठित करें।  श्री आत्मानंद जैन सभा के अध्यक्ष चन्द्र कुमार कोचर ने स्वागत भाषण में आचार्यश्री से बीकानेर में संक्रंाति पर्व का लाभ देने को अनुकरणीय बताया। वरिष्ठ गायक महेन्द्र कोचर, पिन्टू स्वामी, लुधियाना के प्रवीण भाई, अनिल जैन व मुंबई के भरत भाई ने भक्ति रचनाएं पेश कर श्रावक-श्राविकाओं को भाव विभोर कर दिया।
विहार आज- गच्छाधिपति जैनाचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी महाराज बुधवार को सुबह विहार कर सार्दुलगंज व उनके सहवृृति मुनि पलाना जाएंगे। गच्छाधिपति सार्दुलगंज में परमात्मा मंदिर का भूमि पूजन करवाएंगे। सार्दुलगंज से गच्छाधिपति पलाना व उसके बाद नागौर होते हुए पाली की तरफ विहार करेंगे।
कोचर उपासरे में पूजा- आचार्य श्री विजयानंद सूरीश्वर जी ( आत्माराम जी ) महाराज के 185वें जन्म दिवस पर साध्वीश्री संयम प्रभा, सौम्य दर्शना, अक्षय दर्शना व परम दर्शना के सान्निध्य में भक्ति संगीतमय अष्ट प्रकार की पूजा कोचरों के चैक के महिला उपासरे में की गई। पूजा के दौरान आचार्यश्री विजयानंद सूरिश्वरजी की प्रतिमा पर विशेष श्रृृंगार किया गया तथा जल, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, अक्षत व नेवैद्य चढ़ाया गया। विभिन्न रागों व तर्जों में भक्ति गीत गाए गए। पूजा के दौरान रामरतन कोचर परिवार की ओर से प्रभावना की गई। भक्ति गीत कंचन कोचर के नेतृत्व में गाए गए।

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