कैमल इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र देगा ऊंटपालकों को ट्रेनिंग




बीकानेर (सीके न्यूज/छोटीकाशी)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र बीकानेर [एनआरसीसी] कैमल इको टूरिज्म (उष्ट्र पारिस्थिकीय पर्यटन) को बढ़ावा देने के लिए 3 से 5 मार्च के दौरान 'उष्ट्र पर्यटन सजावटी ऊन कल्पन का महत्व' विषयक 3 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करेगा। केन्द्र निदेशक डॉ आर्तबन्धु साहू ने इस विशेष प्रशिक्षण के बारे में कहा कि एनआरसीसी द्वारा उष्ट्र कल्पन व्यवसाय से जुड़े पारंपरिक कुशल कारीगरों के माध्यम से लगभग 20 ऊँट पालकों एवं किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। तदुपरांत प्रशिक्षित प्रशिक्षणार्थी ट्रेनिंग के माध्यम से प्राप्त ज्ञान (कलाहुनर) को आगे बढ़ाते हुए इसे ऊँट पालकों को हस्तांतरित करेंगे। डॉ साहू ने स्पष्ट किया कि ऊँटों की बहुआयामी उपयोगिता एवं पर्यटन व्यवसाय के नए आयाम के स्वरूपों को ध्यान में रखते हुए केन्द्र, उष्ट्र प्रजाति पर गहन अनुसंधान के साथ-साथ ऊँट पालकों को उष्ट्र व्यवसाय से जुड़े व्यावहारिक क्षेत्रों में भी पारंगत करना चाहता है ताकि उनकी आमदनी में बढ़ोत्तरी सुनिश्चित की जा सके। केन्द्र में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के समन्वयक डॉ.आर.के.सावल, प्रधान वैज्ञानिक होंगे।

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