हरित उर्जा व अक्षय उर्जा का उपयोग ही वर्तमान में बढ़ते प्रदुषण के नियंत्रण का एक मात्र समाधान : प्रो. एम.पी. पूनिया





बीकानेर, 25 दिसम्बर (छोटीकाशी डॉट पेज)। एआईसीटीई दिल्ली के उपाध्यक्ष प्रो. एम.पी. पूनिया ने शुक्रवार को कहा कि हरित उर्जा व अक्षय उर्जा का उपयोग ही वर्तमान में बढ़ते प्रदुषण के नियंत्रण का एक मात्र समाधान है। आज पंजाब जैसे राज्य में जल व वायु 90 प्रतिशत तक प्रदूषित हैं व वायु, मिट्टी और पानी की गुणवत्ता दिन प्रतिदिन घटती जा रही है। राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय बीकानेर और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र के संयुक्त तत्वावधान में टैक्युप द्वारा प्रायोजित स्वच्छ ऊर्जा की चुनौतियां व अनुप्रयोग विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के वेबेक्स एप्प के माध्यम से आगाज मौके पर प्रो. पूनिया ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस तरह की समस्या व जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिये व ऊर्जा के सीमित संसाधन को देखते हुए अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में नवोन्मेषण व शोध पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया की सम्पूर्ण देश में प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है व अक्षय ऊर्जा के दोहन से ग्रामीण भारत में रोजगार के साथ किसानो व मजदूरों के आय बढ़ेगी जिससे हमें आत्म निर्भर बनने में मदद मिलेगी। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ जयप्रकाश भामू व एनआईटी कुरुक्षेत्र के डायरेक्टर, पद्मश्री डॉ सतीश कुमार ने अपने उद्बोधन में बताया कि हमारे देश में सौर, पवन और अक्षय ऊर्जा के कई विकल्प मौजूद हैं जिसकी मदद से हम देश की ऊर्जा की व्यवस्था को बदल सकते हैं। खत्म होते पेट्रोल डीजल और कोयला को देखते हुए हमें नित्य नए उर्जा के स्रोतों पर विचार करना चाहिए। यही वजह है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत का उपयोग देश में तेजी से बढ़ने लगा है। ईसीबी इससे पहले बीकानेर के भीनासर गाँव के 10 साल से बंद पड़े बायो गैस प्लांट को शिक्षकों व विद्यार्थियों की टीम के माध्यम से ठीक कर चुका है। उद्घाटन सत्र में बोलते हुए ऑर्गेनाइजिंग चेयर ईसीबी के डॉ ओ पी जाखड़ व एनआईटी कुरुक्षेत्र के टेक्विप के समन्वयक प्रो साथन्स ने बताया कि जितनी ऊर्जा हम बचाएंगे, उतनी हम अगली पीढिय़ों के लिए बचा सकेंगे। उन्नत भारत अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो वीरेंद्र कुमार विजय ने अपने व्याख्यान में बायो गैस के उत्पादन, उपयोग व क्षमता बढ़ाने के उपायों की विस्तार से चर्चा की। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सी एस राजोरिया व इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ विकास शर्मा ने बताया कि पिछले तीन दशकों में, हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से अनुसंधान और विकास कार्य हुए हैं और भविष्य में इसके उपयोग की अपार संभावनाएं है वहीं कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस जैसे पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए हरित ऊर्जा के उपयोग पर बल दिया। सम्मेलन के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ रजनीश (एनआईटी कुरुक्षेत्र), डा गणेश प्रजापत, डॉ रवि कुमार (ईसीबी बीकानेर) ने सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों व विशषज्ञों का आभार व्यक्त किया व समय की ज़रूरत को देखते हुए ऊर्जा के क्षेत्र में इस तरह के अन्य कार्यक्रमों के आयोजन पर ज़ोर दिया जिससे युवा इंजीनियर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सके। 


कांफ्रेंस में इन देशों की रही प्रतिभागिता

भारत के कई राज्यों समेत ऑस्ट्रेलिया, टर्की व ईजिप्ट इत्यादि देशों के विभिन्न तकनिकी महाविद्यालयों, अन्वेषण प्रयोगशालाओं एवं विश्वविद्यालयों के 150 से अधिक शिक्षक एवं रिसर्च स्कॉलर भाग ले रहे है।