गैर शैक्षणिक कार्यों के उपयोग के लिए शिक्षकों को शामिल किया, दुर्भाग्यपूर्ण कहते हुए शिक्षकों में रोष


 


बीकानेर, 27 अक्टूबर। वर्तमान में एक बार फिर शिक्षकों को वन नेशन वन राशन कार्ड  योजना के तहत प्रदेश की सभी उचित मूल्य की दुकानों को आनलाइन किये जाने की प्रक्रिया में उपभोक्ताओं के राशन कार्ड का आधार कार्ड से सीडिंग कर उसका सत्यापन कार्य करने में लगाये जाने के आदेश सम्बन्धित जिला कलेक्टरों के माध्यम से किये गये है। इस सत्यापन कार्य के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की और से बीएलओ की नियुक्ति की जाकर कार्य को पूर्ण करने के निर्देश दिये गये है। अधिकांश स्थानों पर बीएलओ के रूप में शिक्षक ही कार्य कर रहे है ऐसी स्थिति में एक बार पुन: गैर शैक्षणिक कार्यो के उपयोग में शिक्षकों को लिया गया है जिसे रोका जाना चाहिए। इस सम्बन्ध में राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षामंत्री को ज्ञापन भेजकर बीएलओ शिक्षकों को डयूटी के अन्र्तगत अन्य गैर शैक्षणिक कार्यो से मुक्त करवाने की मॉग के साथ ही संगठन ने सुझाव देते हुए लिखा है कि कोविड 19 की महामारी सेे उपजे आर्थिक संकट से उबरने के लिए बेरोजगार युवाओं के माध्यम से उक्त कार्य को पूर्ण करवाये जाने से आर्थिक सम्बलन देने के सरकार के पक्ष को मजबूती मिलेगी। संगठन के प्रदेशमंत्री रवि आचार्य ने कहा कि जिला प्रशासन ने बीएलओ शिक्षकों को एक अतिरिक्त पद का कार्मिक मानते हुए जिले के समस्त किसी भी कार्य को पूर्ण करने वाले अधिकारी के अनुसार निर्देशित कर रहे है जो न्यायोचित नही है। आचार्य ने कहा कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत और माननीय न्यायालय के निर्देशो के अनुसार शिक्षकों को इस प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्यो में रोक लगायी गयी है रोक के बाद भी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा इस प्रकार की डयूटी लगायी जाकर शिक्षको के सम्मान एवं गरिमा को ठेस पहुॅचाने का कार्य किया गया है जिस पर तत्काल रोक लगायी जाने की आवश्यकता है। प्रदेशमंत्री आचार्य ने वन नेशन वन राशन कार्ड  योजना आनलाइन कार्य में  बीएलओ शिक्षकों को लगाये जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मॉग सरकार से की है। प्रदेश सयुक्त मंत्री सुरेश व्यास ने कहा कि  बीएलओ के कार्य में निर्वाचन सम्बन्धी कार्य है तथा वर्तमान में निवार्चन के अतिरिक्त समस्त गैर शैक्षणिक कार्यो में बीएलओं शिक्षकों को धकेला जाकर शिक्षको को परेशान ही नही किया जा रहा अपितु माननीय न्यायालय के निर्देशों की अवेहलना भी की जा रही है। मंत्री कैलाशदान ने कहा कि एक तरफ  सरकार शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यो में नही लगाये जाने के निर्देश जारी करती है वही दूसरी और सरकार के अन्य विभागों द्वारा निरन्तर शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यो को पूर्ण करवाने के लिए मजबूर कर सरकार दोहरा मापदण्ड अपना रही है।



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