जीवन शाश्वत, मृत्यु केवल सीमा : योगी विलासनाथजी / बाल ब्रह्मचारी आचार्य के निधन पर व्यक्त की संवेदना


 


 सादुलपुर (छोटीकाशी ब्यूरो)। जितनी खुशी हमें किसी इंसान के जन्म की होती है, उतना ही गम हमें किसी इंसान के इस दुनिया से जाने का होता है। यह संसार और प्रकृति के नियमों के अधीन है और परिवर्तन एक नियम है। यह कहा बीकानेर के श्री नवलेश्वर मठ के संत योगी श्री विलासनाथजी महाराज ने। वे यहां गीता सदन में गत दिनों वरिष्ठ पत्रकार मदन मोहन आचार्य के युवा बाल ब्रह्मचारी पुत्र गिरधर गोपाल आचार्य के असामयिक निधन पर शोक संवेदना वक्तव्य में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन शाश्वत व प्रेम अमर और मृत्यु केवल एक सीमा है, जबकि शरीर मात्र साधन है। नाथजी महाराज ने कहा कि जीवन कभी-कभी क्रूर होता है, लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि हम उस जीवात्मा के प्रभु के श्रीचरणों में स्थान पाने की प्रार्थना के साथ अपने चेहरे पर मुस्कान प्रारंभ करें ताकि हम उनकी आत्मा को भी खुश कर सकें। संतश्रीजी ने यह भी कहा कि भगवान जो करता है उसके पीछे कुछ न कुछ छुपा होता है फिर भी दुख कितना भी बड़ा क्यों ना हो व्यक्ति को धैर्य और संतुलन रखना ही चाहिए। इस अवसर पर आचार्य परिवार के सदस्यों ने विलासनाथजी महाराज की संवेदना पर वंदन करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया।


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