नवमी तक होगी माता भगवती के नौ रुपों की उपासना : पं. ज्योतिप्रकाश श्रीमाली







बीकानेर, 1 अप्रैल (सीके न्यूज/छोटीकाशी)। हिन्दू नववर्ष 2 अप्रैल, शनिवार से शुरु हो रहा है। चैत्र नवरात्रि प्रथम शुभ मुहूर्त सुबह 6:22 बजे से सुबह 8:31 बजे तक, घट स्थापना का दूसरा शुभ अभिजीत दोपहर मुहूर्त 12:08 से दोपहर 12:57 बजे तक है। जाने-माने ज्योतिषी पं. ज्योतिप्रकाश श्रीमाली के अनुसार चैत्र नवरात्र का महत्व इसी बात से स्पष्ट होता है कि इसी दिन परम पिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी व राजा विक्रमादित्य ने भी इसी दिन अपना सम्वत्सर प्रारम्भ किया था। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन आदि के लिए श्रेष्ठ अवधि होता है। मां भगवती की पूजा-उपासना के लिए भी यह समय श्रेष्ठ होता है। प्रतिपदा से लेकर के नवमी पर्यंत माता भगवती के नौ रूपों की उपासना की जाती है। सनातन धर्म को मानने वाले लोग इस नवरात्र में अपने घर को मंगल ध्वज तोरण आदि से सुसज्जित करते हैं। इस समय भगवती के साथ माता गौरी का भी दर्शन-पूजन प्रतिदिन क्रमानुसार किया जाता है। महा अष्टमी का व्रत नौ अप्रैल को किया जाएगा। महानवमी 10 अप्रैल को होगा। नवरात्र से संबंधित हवन-पूजन नवमी पर्यंत कर लिए जाएंगे। इसी दिन रामनवमी का पावन पर्व सर्वत्र बड़े ही धूमधाम के साथ परंपरा के अनुसार मनाया जाएगा। पं. ज्योतिप्रकाश श्रीमाली के अनुसार नवरात्र व्रत का पारण 11 अप्रैल को दशमी तिथि में किया जाएगा। देवी भागवत पुराण के अनुसार नवरात्र में मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर हो रहा है, जबकि प्रस्थान भैंसे पर होना है। यह दोनों ही सवारियां लोगों को सतर्क और जागरुक रहने का संदेश देती हैं। घोड़ा युद्ध का प्रतीक है। ऐसे में सत्ता पक्ष को विरोध का सामना करना पड़ेगा, तेज हवाओं से फसलों को नुकसान हो सकता है। देश में अस्थिरता, तनाव, अचानक बड़ी दुर्घटना, भूकंप, चक्रवात आदि से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। आम जनमानस के सुखों में कमी की अनुभूति होती है। भैंस की सवारी का अर्थ रोग, कष्ट का बढऩा है। ऐसे में लोगों को अपनी सेहत के प्रति जागरुक रहने की जरूरत है।