किसान कृषि वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लें और देश व राज्य की प्रगति में भागीदार बने - प्रो आर पी सिंह कुलपति





गोद लिए गाँव में गतिविधियां बढ़ाई जाये और किसानों के कृषि-तकनीकी जिज्ञासा पूरी करें - कुलपति ने किया निर्देशित


बीकानेर, 26 अक्टूबर। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने यूनिवर्सिटी सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत गोद लिए गए गांव कावनी में आयोजित स्वच्छता अभियान और पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लिया और कावनी गांव के पंचायत भवन में किसानों व ग्रामीणों को संबोधित किया। कुलपति प्रो.आर.पी. सिंह ने बताया की कृषि विज्ञान केंद्र और विश्वविद्यालय ग्रामीण-किसानों को तकनीकी हस्तांतरण के लिए शुरू से प्रतिबद्ध हैं।कृषि में कम से कम लागत आए और किसानों की आमदनी दुगनी हो इसके लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। समय के साथ-साथ किसान की स्थिति में सुधार हुआ है। किसानों की समस्याओं का जवाब देते हुए सुझाव दिया कि कृषि वैज्ञानिक नियमित बैठक के साथ-साथ हर महीने मंगलवार को किसानों की समस्या समाधान हेतु उपस्थित रहेंगे। यदि किसान चाहे तो जिस क्षेत्र में कृषि संबंधी समस्या है वहां की वनस्पति/पौधे/क्षेत्र का फोटो लेकर कृषि वैज्ञानिकों को भेज सकते हैं और अपना समाधान शीघ्र प्राप्त कर सकते हैं। यदि बड़े क्षेत्र में समस्या है तो विधिवत कृषि वैज्ञानिक टीम आएगी और सर्वे कर उचित समाधान बताएगी। यूनिवर्सिटी सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत जनवरी 2021 में कावनी गांव को गोद लिया गया तब से  विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाती रही है जैसे कि शुष्क बागवानी के फलों सब्जियों का मूल्य संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम, महिला शिक्षा व सशक्तिकरण व भ्रूण हत्या रोकने संबंधी जागरूकता रैली, अनुसूचित जाति के किसानों को छिड़काव मशीन विद्युत-चालित उपलब्ध करवाना आदि। इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्र से द्वारा और असंस्थागत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसी कड़ी में आज पौधरोपण एवं स्वच्छता स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किया गया है।  स्वच्छता विषय पर चर्चा करते हुए कहा की सरकार के जन जागरूकता प्रयासों से गावों में शौचालय से लेकर गली मोहल्लों में साफ सफाई देखी जा सकती है और ग्रामीणों ने साफ सफाई के कार्यक्रमों में हमेशा तत्परता दिखाई है। किसान कृषि वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लें और देश व राज्य की प्रगति में भागीदार बने । ग्रामीण व किसानों ने मौके पर मौजूद डॉ पी एस शेखावत, निदेशक अनुसंधान से संवाद कर कृषि समस्याओं का हल जाना। डॉ शेखावत ने बताया कि डीएपी उपलब्ध नहीं होने पर एसएसपी काम में लिया जा सकता है एक कट्टा प्रति बीघा की मात्रा पर्याप्त होती है। इसके अलावा बिजाई का तरीका, निराई गुड़ाई की उपयोगिता, पर-ड्रॉप मोर-क्रॉप, सेवण व धामण घास लगाने, बीज उपचार विधि पर चर्चा की। चने की खेती के बारे में जाना। उपस्थित माधो सिंह किसान ने पौधे में लट की जानकारी दी तो किसी ने अनार झड़ने के लिए बोरोन का स्प्रे जैसा सुझाव जाना। इस दौरान अनुसन्धान निदेशक डॉ. प्रकाश सिंह शेखावत, प्रसार शिक्षा निदेशालय के निदेशक डॉ सुभाष चन्द्र उपनिदेशक डॉ. आर के वर्मा, डॉ दुर्गा सिंह  मौजूद रहे। संचालन डॉ. केशव मेहरा ने किया।

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