कम पानी का प्रयोग कर अधिक उत्पादन लेने की तकनीक अपनाकर खेती करें : पद्मश्री सूण्डाराम




सीके न्यूज। छोटीकाशी। बीकानेर। देश के जाने-माने प्रगतिशील किसान वैज्ञानिक पद्मश्री सूण्डाराम वर्मा ने शुक्रवार का कहा कि किसानों को परम्परागत खेती की उन तकनीकों को पुन: उजागर करना पड़ेगा जिन्हें वो भूल चुके हैं। उन तकनीकों के बिना आने वाले समय में खेती से लाभ लेना संभव नहीं होगा। पानी के उपयोग की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कम से कम पानी का प्रयोग करते हुए अधिक उत्पादन लेने की तकनीक अपनाकर खेती करनी चाहिए। इसके लिए नमी को संरक्षित करना सबसे महत्वपूर्ण है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान में आयोजित पोषण वाटिका महाअभियान और वृक्षारोपण कार्यक्रम में उन्होंने बीकानेर के आसपास के गावों के प्रगतिशील किसानों और बालिकाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि नमी के लिए सितम्बर माह में होने वाली बरसात वरदान होती है। एक लिटर पानी से एक वृक्ष के अपने सिद्धांत पर बात करते हुए कहा कि नमी को भूमि में संरक्षित करते हुए इस तकनीक से पौधा लगाने पर पानी का उपयोग नहीं के बराबर ही होता है। मोटे अनाजों को अपनाने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि बाजरा, ज्वार, रागी सहित सभी मोटे.छोटे ये अनाज पोषण के भण्डार हैं। आज इनको भोजन से दूर करके मानवजाति ने कई प्रकार की बीमारियां पाल ली हैं। इससे पूर्व संस्थान के प्रभारी निदेशक डॉ दिलीप कुमार समादिया ने कहा कि पोषक अनाज न केवल पोषण देते हैं वरन् ये शरीर में लगने वाली बहुत सी बीमारियों से बचाते भी है। संस्थान के फसल सुधार विभाग के अध्य्क्ष डॉ धुरेन्द्रा सिंह ने कहा कि पोषक अनाज की खेती में पानी और समय दोनों की बचत है। किसान को अब खेती करने की विधि में परिवर्तन करना होगा। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ मुकेश कुमार जाटव ने मोटे-छोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार, रागी, कंगनी, सामा, सनवा, कोदो आदि के बारे में बताते हुए मानव शरीर में इनको खाने से होने वाले अच्छे प्रभावों को विस्तांर से समझाया। इस अवसर पर एक कार्यक्रम का प्रसारण भी किया गया जिसमें तेलंगाना से सीधे केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, कृषि एवं किसान कल्याण राज्यामंत्री कैलाश चौधरी ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर आमंत्रित किसानों को संस्थान द्वारा विकसित पालक की किस्म हरी पर्ण के बीज और फलदार पौधे वितरित किए। किसानों द्वारा संस्थान में बड़ी संख्या में वृक्षारोपण भी किया गया। कार्यक्रम में डॉ अजय कुमार वर्मा ने मंच संचालन किया।