एनआरसीसी में मेगा ट्री प्लांटेशन ड्राईव : तीन हजार से अधिक पौधे लगाए





सीके न्यूज/छोटीकाशी। बीकानेर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बीकानेर स्थित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र [एनआरसीसी] एवं केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान [सीआईएएच] के संयुक्त तत्वावधान में सघन वृक्षारोपण अभियान (मेगा ट्री प्लांटेशन ड्राईव) के तहत 3000 से अधिक पौधे लगाए गए। एनआरसीसी व सीआईएएच के मध्य सघन बागवानी-चरागाह विकास हेतु हुए एमओयू के तहत केन्द्र के कृषि परिक्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में अनार, खेजड़ी, गूंदा आदि फलदार पौधों के अलावा फूल वाले पौधों एवं सेवण, धामण, ग्रामणा घासों का भी रोपण किया गया। एनआरसीसी में मेगा ट्री प्लांटेशन अभियान के इस अवसर पर मुख्य अतिथि सीआईएएच के निदेशक डॉ पी.एल. सरोज ने कहा कि बीकानेर स्थित परिषद के सभी संस्थान अपने अधिदेशों के अनुरूप भिन्न-2 कार्य कर रहे हैं। एक समन्वित कार्ययोजना के माध्यम से इन सभी संस्थानों में अपशिष्‍ट पदार्थों का बेहतर उपयोग तलाशते हुए एक निधि तैयार किए जाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि हमारी अर्थव्यवस्था पशुधन व फसल आधारित होती है तथा पौधों एवं घास की कई प्रजातियाँ एक दूसरे के परिपूरक हैं। ऐसे माइक्रोक्लामेट के तहत उत्पादन के साथ मृदा एवं वातावरण में भी अपेक्षित सुधार लाया जा सकता है। केन्द्र निदेशक डॉ आर्तबन्धु साहू ने कहा कि केन्द्र द्वारा इस सघन वृक्षारोपण के तहत पर्यावरणीय दृष्टि से एनआरसीसी के कृषि परिक्षेत्र को हरा-भरा बनाने के साथ-साथ ऊंटों के पौष्टिक आहार के रूप में फलदार पौधे एवं इस पशु की पसंदीदा घासों युक्त बागवानी-चरागाह विकसित किया जाएगा। केन्द्र द्वारा इन वृक्षों से प्राप्त फल, पत्तियां आदि को पशु आहार के रूप में प्रयुक्त किया जा सकेगा। साथ ही इन वृक्षों का औषधीय महत्व होने के कारण ऊंटनी के दुग्ध उत्पादन में सुधार लाने के अलावा ऊंटों के त्वचा रोगों के प्रबंधन में भी सहायता मिल सकेगी। पशु पालक एवं किसान भाई विकसित बागवानी-चरागाह से प्रेरित होकर अपने पशुओं हेतु स्थानीय स्तर पर उपलब्ध चारा स्रोतों से आहार के रूप में पौष्टिक ऊर्जा स्रोत तैयार कर सकेंगे। इससे प्रचलित अनुपूरक पशुआहार में होने वाले खर्चों को भी काफी हद तक कम कर सकेंगे। वे इससे दोहरा लाभ ले सकेंगे जिनमें फसल से कमाई के साथ बागवानी से भी आय अर्जित की जा सकेगी। सघन वृक्षारोपण के इस अवसर पर राष्ट्रीय अश्‍व अनुसंधान केन्द्र के डॉ एस.सी.मेहता, सीआईएएच के प्रधान वैज्ञानिक डॉ बी.डी.शर्मा, डॉ धुरेन्द्र सिंह, भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ बनवारी लाल सहित केन्द्र के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम समन्वयक महेन्द्र कुमार राव, सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी ने बताया कि प्रायोगिक ब्‍लॉक के तहत एक तरफ  फलदार वृक्ष तथा दूसरी तरफ  पशुओं के लिए पौष्टिक घासों जिनमें सेवण, धामण, ग्रामणा आदि के पौधे लगाए गए। साथ ही आवारा जानवरों से प्रक्षेत्र की सुरक्षा हेतु हैज पौध लगाई गई।   

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