BTU के सम्बद्ध इंजीनियरिंग कॉलेज ने बनाया सस्ता ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम





बीकानेर, 16 मई (सीके न्यूज/छोटीकाशी)। कोरोना वायरस की वजह से आज पूरा विश्व बहुत बड़ी चिकित्सकीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने यहां के लोगों के सामने प्राणवायु ऑक्सीजन की भारी कमी तथा अत्यधिक मांग के कारण एक बहुत बड़ी समस्या खड़ी कर दी है, इस समस्या के समाधान हेतु बीकानेर तकनीकी विश्विद्यालय (बीटीयू) अपने नवाचारों के साथ राहत भरी खबर लेकर आया हैं। सहायक जन सम्पर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि इस जनोपयोगी नवाचार के लिए कुलपति डॉ अम्बरीश शरण विद्यार्थी ने टीम को बधाई दी और इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इंजीनियरींग में नवाचारों के माध्यम से सोशीयल इंजीनियरींग की नई अवधारणा विकसित हुई हैं जो हमारे मानव समाज की सेवा की बुनियाद बनी हैं। मानव समाज की समस्या को समझते हुए समाधान विकसित करना ही सच्ची इंजीनियरींग हैं। इसे और अधिक विकसित कर पटेंट और ओद्योगिक उत्पादन से साथ इसका वृहतम स्तर पर उपयोग किया जा सकता हैं। विश्विद्यालय ऐसे आविष्कारो को प्रोत्साहन देने के लिए पूरा सहयोग प्रदान करेगा। राठौड़ ने बताया कि बीटीयू से सम्बद्ध राज इंजीनियरिंग कॉलेज जोधपुर की टीम ने बहुत ही कम कीमत में सस्ता होममेड ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का प्रोटोटाईप बनाने का कारनामा कर दिखाया है। यह कंसंट्रेटर बाजार में उपलब्ध नामी कंपनियों के कंसंट्रेटरों के मुकाबले दो गुना से अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध करवा सकता है। यह प्रति मिनट 12 से 14 लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन करता है। इससे दो मरीजों को एक साथ जोड़ा जा सकता है। आज के हालात में जहां कोरोना महामारी के मरीजों को समय पर प्राणवायु ऑक्सीजन की सबसे ज्यादा जरूरत है तथा उसके विपरीत उपलब्धता सबसे कम हैए ऐसे समय में यह नवाचार कोरोना मरीजों के लिए वरदान साबित होगा। बाजार में आसानी से उपलब्ध होने वाले वाटर प्यूरीफ ायर उपकरण एवं महज 10000 से 12000 रुपयों की लागत से निर्मित यह ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मौत की जंग लड़ रहे कोरोना रोगियों के लिए संजीवनी का कार्य करेगा। राज ग्रुप ऑफ इंस्टीटीयूशन के चेयरमैन डॉ राजूराम चौधरी के निर्देशन में रजिस्ट्रार पंकज सांखला, महेंद्र सांखला व हर्षवर्धन शर्मा की टीम ने मिलकर पूरे 8 दिन के कड़े प्रयासों द्वारा जुगाड़ से इस होममेड ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को तैयार किया है। यह मशीन 10.12 लीटर प्रति मिनट तक के वेग से ऑक्सीजन बना सकती है साथ ही यह बाजार में विभीन्न कम्पनियों के कंसंट्रेटर की तुलना में आसानी से ऑपरेट किया जा सकता हैं। जल्द से जल्द उनकी टीम द्वारा  मशीन के डिजाइन में फेरबदल कर एक मशीन का नया प्रारूप तैयार किया जा रहा है जिसमें कम से कम 2 मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई जा सकेगीए इससे मौजूदा कीमत को प्रति व्यक्ति और कम किया जा सकेगा। पिछले कई समय से इस प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा था देशी जुगाड़ का इस्तेमाल कर इस नवाचार को निर्माणकर्ता टीम दुवारा आखिर अमलीजामा पहनाया गया। इसके सफल प्रयोग के साथ ही इंजीनियरिंग के माध्यम से आमजन की पहुँच में आने वाले सस्ते ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के निर्माण का विकल्प तैयार हुआ हैं। इसे नवाचार को राज्य सरकार के अनुमोदन के लिए भिजवा गया हैं इसके अनुमोदन के बाद इसके उत्पादन के की शुरुवात की जाएगी।


नवाचार ही विद्यार्थी की उद्यमिता को विकसित करती है  


निदेशक अकादमिक डॉ यदुनाथ सिंह ने कहा कि किसी देश की प्रगति में नवाचार सबसे महत्वपूर्ण है एवं नवाचार ही विद्यार्थी की उद्यमिता को विकसित करती हैं । रचनात्मक क्षमता और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर आधारित नवाचार जरिए चुनौतियों का सामना करते हुए इस होममेड ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के निर्माण से सभी लाभान्वित होंगे। ज्ञान, कौशल और सेंवा भाव के सम्मिश्रण के साथ बीकानेर तकनीकी विश्विद्यालय के सम्बद्ध इंजीनियरींग कॉलेज दुवारा किया गया यहाँ प्रयास सराहनीय हैं जो हमारे असंख्य कोरोना पीडि़त भाई-बहनों के लिए नया जीवन प्रदान करेगा।


इस तरह काम करता हैं जुगाडु ऑक्सीजन कंसंट्रेटर

राज इंजीनियरिंग कॉलेज की टीम ने ऑक्सीजन प्लांट की तर्ज पर एक छोटा प्लांट बनाने की ठानी और चंद दिन की मेहनत से इसे तैयार कर दिखाया। उन्होंने वाहनों में हवा भरने वाला एक छोटा कंप्रेसर खरीदा। इसके ऊपर एक फिल्टर लगा दिया ताकि डस्ट पार्टिकल को रोका जा सके। वहीं इसमें से निकलने वाली हवा से आद्रता को हटाने के लिए घरों में काम आने वाले वाटर प्योरिफ ायर की एक बोटल में सिलिका को भर जोड़ दिया। इसमें से हवा निकलते ही उसकी नमी गायब हो जाती है। इसके बाद हवा को ऐसी ही जियोलाइट से भरी एक ट्यूब से निकाला जाता है। ऐसा करने से हवा में मौजूद नाइट्रोजन को यह रोक देता है और ऑक्सीजन को आगे निकाल देता है। एक बार ऑक्सीजन आगे जाती है तो उसकी कुछ हिस्सा वापस पीछे आता है ताकि उसके साथ नाइट्रोजन बाहर निकल सके। नाइट्रोजन के मॉलिक्यूल्स बड़े होते है। इस कारण वे जियोलाइट से बाहर नहीं निकल पाते है। ऐसा करने से 80 से 82 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन आसानी से मिल जाती है। वहीं 12 से 14 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट मिल जाती है। इससे दो लोगों को एक साथ ऑक्सीजन दी जा सकती है। निर्माणकर्ता टीम ने इसे  सुंदर बनाने पर ध्यान नहीं दिया हैं ऐसा करने से वे लागत को बारह हजार तक सीमित रखने में सफल रहे। यह प्रति मिनट 12 से 14 लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन करता है एवं इससे दो मरीजों को एक साथ जोड़ा जा सकता है।

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