एक जमाने में खादी का देश के साथ गहरा रिश्ता था, चौथी पीढ़ी को भी खादीधारी के लिए कर रहे प्रेरित : कैलाश पाण्डे





बीकानेर, 26 जनवरी (सीके मीडिया/छोटीकाशी)। एक जमाने में खादी का देश के साथ गहरा रिश्ता था। भारत के हाथ कते-हाथ बुने वस्त्र ने तब से लेकर अब तक लम्बी यात्रा की है। कुछ साल पहले ही इसने फैशन की दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है और उसने महात्मा गांधी की खादी को नया आयाम दिया है। यह बात क्षेत्रीय समग्र लोक विकास संघ, बीकानेर के मंत्री कैलाश पाण्डे ने मंगलवार को दी। खादी के लाभों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि एक पीढ़ी ऐसी है जो पूर्ण निष्ठा से खादी के प्रति समर्पित है। 82 वर्षीय बद्रीदत्त पाण्डे जिन्होंने रघुवर दयाल गोईल के साथ खादी का कार्य किया, उनके पुत्र कैलाश चन्द्र पाण्डे जो बीकानेर में ए-श्रेणी की खादी संस्था 'क्षेत्रीय समग्र लोक विकास संघ, बीकानेर' को संचालित कर रहे है। पाण्डे द्वारा अपने पौते मान्विक पाण्डे को भी खादीधारी होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मान्विक ने गणतंत्र दिवस पर तिरंगे को सलामी दी व गीत गाया। उन्होंने कहा कि भारत के गरीब कतिन-बुनकरों को अधिकाधिक रोजगार मिले इसके लिए गणतंत्र दिवस पर सभी को खादी वस्त्रों के अपने जीवन पर अपनाना चाहिए। पाण्डे ने बताया कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजस्थान के उच्च शिक्षा मंत्री भंवरसिंह भाटी अपने व्यस्ततम समय में से कुछ समय निकाल कर संस्था में पधारे तथा खादी वस्त्र पसन्द किए एवं वूलन खादी जाकेट का नाप दिया। मंत्री अधिकांश खादी वस्त्र इसी संस्थान से तैयार कराते है, साथ ही उन्होंने संस्था के अध्यक्ष रामदास शर्मा से भी दूरभाष पर वार्ता कर संस्था के समस्त कार्यकर्ताओं से वार्ता की तथा संस्था मंत्री की प्रशंसा की।