राज्य में भी गुजरात व महाराष्ट्र की तर्ज पर मोटर व्हीकल एक्ट का किया जाए सरलीकरण 


 


बीकानेर, 18 जुलाई (छोटीकाशी डॉट पेज)। गुजरात व महाराष्ट्र की तर्ज पर राजस्थान में भी मोटर व्हीकल एक्ट का सरलीकरण किए जाने की मांग प्रदेश के बीकानेर संभाग मुख्यालय से उठी है। यह मांग बीकानेर जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष द्वारका प्रसाद पचीसिया, तोलाराम पेडिवाल, इन्द्रचन्द मालू ने कलेक्टर के मार्फत सीएम अशोक गहलोत को लिखी चिट्ठ में की है। चिट्ठ में बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा जारी जुलाई 3 के आदेशों के तहत मोटर व्हीकल एक्ट में भारी जुर्माने का प्रावधान 20,000 कर दिया गया है। वर्तमान में कोरोना माहामारी जिससे व्यापार व उद्योग जगत के भविष्य को गर्त में धकेल दिया है। महामारी के कारण सभी व्यापार व उद्योग धंधे लगाने के लिए उद्योग नीतियाँ जारी की जा रही है वहीं दूसरी और राज्य सरकार द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों में भारी जुर्माने कि राशी लगाकर व्यापार व उद्योग के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर दिया है, जबकि महाराष्ट्र व गुजरात में क्रमश: यह जुर्माना राशि 1000 से 2000 रूपये का प्रावधान है, भारी जुर्माने के कारण एवं राजस्थान में महाराष्ट्र एवं गुजरात से तकरीबन 10 रूपये डीजल की दरें अधिक होने के कारण ट्रांसपोर्टर माल लाने व ले जाने में आनाकानी करने लगे है या भारी किराया राशि की मांग करने लगे हैं जिससे माल की लागत भी ज्यादा आने लगी है। उदाहरणत: मालवाहक गाडिय़ों में 10 चक्का गाड़ी जो कि 18 टन माल का परिवहन करती है उसमें ऊन जैसा माल केवल 5 टन का ही होता है ऊन का धागा एक गाड़ी में 11.5 टन के लगभग जाता है लेकिन ऊन व धागे के साथ अन्य परचून माल स्वाभाविक परिवहन में ओवर साइज के कारण गाड़ी का चालान कर दिया जाता है। इसलिए राजस्थान में भी महाराष्ट्र व गुजरात कि तर्ज पर मोटर व्हीकल एक्ट का सरलीकरण किया जाना चाहिए।


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