ऊँट के दूध एवं भेड़ के बालों के सम्मिश्रण पर होगी नई शोध, एनआरसीसी व सीएसडब्ल्युआरआई के मध्य एमओयू





बीकानेर, 19 जनवरी (सीके न्यूज/छोटीकाशी)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत आने वाले राजस्थान में बीकानेर स्थित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) व केंद्रीय भेड़ एवं अनुसंधान संस्थान, अविकानगर के बीच एक नए शोध समझौता पत्र [एमओयू] पर मंगलवार को हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों संस्थानों के बीच हुए इस समझौते पत्र के तहत ऊंट के दूध एवं भेड़ के बालों के सम्मिश्रण पर शोध कार्य किया जाएगा। एनआरसीसी के नए निदेशक डॉ.आर्तबन्धु साहू के आगमन के साथ ही ऊँट प्रजाति के विविध पहलुओं पर नूतन शोध प्रारम्भ होने जा रहा है। डॉ. साहू और सीडबल्यूआरआई के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। एनआरसीसी के निदेशक डॉ.ए.साहू ने नए एमओयू पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उष्ट्र दुग्ध मेंंऔषधीय गुण धर्म विद्यमान है साथ ही इसके बालों का भी प्राचीन समय से पारंपरिक वस्तुओं यथा-कम्बल, दरियां, गलीचे आदि बनाने हेतु उपयोग किया जाता है। वहीं दूसरी ओर भेड़ के बालों की उपयोगिता जगजाहिर है साथ ही इसके दूध के भी कई पारंपरिक उपयोग समाज में प्रचलित हैं। अत: ऐसी परिस्थितियों में ऊँट एवं भेड़ प्रजाति के दूध एवं बालों के सम्मिश्रण पर शोध से वैज्ञानिक एवं तकनीकी ज्ञान के नए क्षेत्र विकसित किए जाने की संभावनाएँ बलवती होंगी। फलत: इन दोनों ही पशुओं की उपयोगिता को और अधिक बढ़ाया जा सकेगा। इस अवसर पर डॉ.रणधीर सिंह भट्ट एवं डॉ. सी.पी.स्वर्णकार भी उपस्थित रहे।

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