अकेले मनरेगा मद में राजस्थान की कांग्रेस सरकार को केन्द्र की मोदी सरकार से रोजाना 88 करोड़ रुपए मिल रहे हैं, यानि..


 
न्यूजडेस्क। 26 मई को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी ने कहा कि लॉकडाउन में गरीबों की मदद करने के लिए केन्द्र सरकार सीधे बैंक खातें में 7 हजार 500 रुपए की राशि जमा करवाए। राहुल के इस बयान के तुरंत बाद राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने भी गरीबों के खाते में नकद राशि जमा करवाने की बात कही। राहुल और गहलोत जब गरीबो की नकद राशि देने की बात कर रहे थे, तभी राजस्थान पत्रिका अखबार को डिप्टी सीएम और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने बताया कि राजस्थान में प्रतिदिन 40 लाख श्रमिकों को मनरेगा में रोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है। 40 लाख श्रमिकों की संख्या देश में सर्वाधिक है। यहां यह उल्लेखनीय है कि सचिन पायलट अशोक गहलोत मंत्रिमंडल  में पंचायतीराज विभाग के मंत्री हैं और मनरेगा श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध करवाने का काम इसी विभाग का है। सब जानते हैं कि पायलट झूठ नहीं बोलते और पत्रिका भी सच्ची खबर प्रकाशित करता है। जब कांग्रेस शासित राजस्थान में चालीस लाख श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है, प्रतिदिन चालीस लाख श्रमिकों के खाते में 88 करोड़ रुपए जमा करवाए जा रहे हैं। प्रतिमाह का हिसाब लगाया जाए तो यह राशि 2 हजार 200 करोड़ रुपए होती है। सब जानते हैं कि मनरेगा श्रमिकों को पूरा भुगतान केन्द्र सरकार द्वारा किया जाता है। यानि राजस्थान के चालीस लाख श्रमिकों (गरीबों) के बैंक खाते में मोदी सरकार 238 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से प्रतिमाह 5 हजार 950 रुपए जमा करवा रही है। यहां एक माह में 25 दिन की मजदूरी ही निकाली गई है। मोदी सरकार की यह राशि अकेले मनरेगा मद की है। ऐसी और भी योजनाएं हैं जिसमें गरीबों को सीधा फायदा मिल रहा है। अब राहुल गांधी और सीएम गहलोत को बताना चाहिए कि मोदी सरकार गरीबों को और कितनी राशि नकद दें? जब अकेले राजस्थान में प्रतिमाह 2 हजार 200 करोड़ रुपए का भुगतान हो रहा है, तब देशभर के भुगतान का अंदाजा लगाया जा सकता है। खुद सचिन पायलट ने माना है कि भाजपा शासित उत्तर प्रदेश से भी ज्यादा श्रमिकों को राजस्थान में मनरेगा के तहत श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है। मनरेगा में काम करने वाले बीपीएल परिवार के होते हैं। ऐसे परिवारों को केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से भी खाद्य सामग्री से लेकर अनेक सुविधाएं मिलती हैं। मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ही कार्य करवाया जाता है। सब जानते हैं कि मनरेगा में अधिकांश कार्य कच्ची प्रवृत्ति के होते हैं। चालीस लाख श्रमिकों का आंकड़ा बताता है कि राजस्थान में गरीब तबके के एक बड़े वर्ग को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। वाकई, एक तरह से यह केन्द्र सरकार का राजस्थान को लॉकडाउन में सीधा सहयोग हैं। 
(साभार : एसपी.मित्तल)


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